यमकेश्वर में भावुक पल: सीएम योगी ने ग्रामीणों से गढ़वाली में कहा—“सब भात खैकन जरूर जाईं”

यमकेश्वर में भावुक पल: सीएम योगी ने ग्रामीणों से गढ़वाली में कहा—“सब भात खैकन जरूर जाईं”

An Emotional Moment in Yamkeshwar

An Emotional Moment in Yamkeshwar

यमकेश्वर। An Emotional Moment in Yamkeshwar, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने पैतृक गांव पंचूर में धार्मिक अनुष्ठान में शामिल होने के बाद ग्रामीणों से मिले। सीएम जब लोगों से मिले तो गढ़वाली में कहा कि सब भात खैकन जरूर जाईं (सब भात खाकर जरूर जाना)। सीएम योगी के अपनी बोली-भाषा में बात करने पर लोग भावुक हो गए।

मंदिर परिसर में यज्ञ और मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के बाद पारंपरिक तौर पर सामूहिक भोजन की व्यवस्था की गई थी।

बड़ी संख्या में क्षेत्र के ग्रामीण कार्यक्रम में पहुंचे। धार्मिक अनुष्ठान के बाद भी योगी ग्रामीणों से एक-एककर मिले। उन्होंने सभी का हाल-चाल पूछा। सीएम योगी के अपनत्व से ग्रामीण भावुक हो गए।

ग्रामीण विकास, राहुल, सरोजनी देवी ने कहा कि हमारे लिए गर्व की बात है कि हमारे क्षेत्र के पंचूर गांव में पैदा हुए योगी आदित्यनाथ आज उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य की कमान संभाल रहे हैं। कहा कि लोग उन्हें टेलीविजन पर देखते हैं, हमें उनसे सीधे मिलने का मौका मिला।

उन्होंने अपनी बोली में हमें भात खाने का निमंत्रण दिया। जिससे लगता है कि पूरे देश में इतनी लोकप्रियता के बावजूद वह अपनी मिट्टी से जुड़े हैं और यमकेश्वर क्षेत्र के विकास के लिए भी लगातार सोचते हैं।

बजंर खेतों को लेकर चिंता, बाबा रामदेव का दिया उदाहरण

सीएम योगी जब भी यमकेश्वर क्षेत्र में आते हैं तो बंजर हो रहे खेतों को देखकर चिंता जताते हैं। उन्होंने ग्रामीण से कहा कि अपने खेतों को छोड़कर शहरों में पलायन न करें।

इन खेतों को उपजाऊ बनाएं और इसी के माध्यम से स्वरोजगार से जुड़ें। इस दौरान उन्होंने बाबा रामदेव का उदाहरण देकर ग्रामीणों को जैविक खेती करने को कहा।

उन्होंने कहा कि बाबा रामदेव लगातार जैविक खेती कर रहे हैं और सभी जैविक उत्पाद पैदा कर रहे हैं। इसलिए सभी क्षेत्रवासियों को इनसे प्रेरणा लेनी चाहिए। इस माटी से हर किसी ग्रामीण को जुड़ना चाहिए। सरकार ने किसानों के लिए कई योजनाएं संचालित कर रखी हैं।

ग्रामीण इन योजनाओं से जुड़कर अपने खेतों को उपजाऊ बना सकता है। अच्छा उत्पादन करने पर किसान अपने को आत्मनिर्भर भी बना सकता है। इसलिए सभी ग्रामीण अपनी माटी से जुड़ें।